पीएम मोदी ने ‘मन की बात’ में कारगिल विजय दिवस पर की बात और बिहार के नौजवानों को आत्मनिर्भर बनने पर दी बधाई

आज मन की बात कार्यक्रम के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को संबोधित किया। उन्होंने ‘मन की बात’ कार्यक्रम में कारगिल विजय दिवस से लेकर और कोरोना महामारी से साबधान रहने पर भी चर्चा की। 

कारगिल विजय दिवस पर बात करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, “आज ‘कारगिल विजय दिवस’ है. 21 साल पहले आज के ही दिन कारगिल के युद्ध में हमारी सेना ने भारत की जीत का झंडा फहराया था। साथियों, कारगिल का युद्ध जिन परिस्थितियों में हुआ था, वो, भारत कभी नहीं भूल सकता।”

बता दें कि पीएम मोदी ने पाकिस्तान पर निशाना साधते हुए कहा कि पाकिस्तान ने बड़े-बड़े मनसूबे पालकर भारत की भूमि हथियाने और अपने यहाँ चल रहे आन्तरिक कलह से ध्यान भटकाने को लेकर दुस्साहस किया था। यहाँ आंतरिक कलह से पीएम मोदी का मतलब वहाँ की राजनीतिक गतिविधियों में सेना का हस्तक्षेप से था।

प्रधानमंत्री ने इस जीत को दुर्लभ बताते हुए कहा, “आप कल्पना कर सकते हैं- ऊचें पहाडों पर बैठा हुआ दुश्मन और नीचे से लड़ रही हमारी सेनाएं, हमारे वीर जवान, लेकिन, जीत पहाड़ की ऊंचाई की नहीं भारत की सेनाओं के ऊंचे हौंसले और सच्ची वीरता की हुई। भारत की वीर सेना ने जो पराक्रम दिखाया, भारत ने अपनी जो ताकत दिखाई, उसे पूरी दुनिया ने देखा।”

पीएम मोदी ने अपनी कारगिल यात्रा की तस्वीरें साझा कर कहा कि उस समय, मुझे भी कारगिल जाने और हमारे जवानों की वीरता के दर्शन का सौभाग्य मिला, वो दिन, मेरे जीवन के सबसे अनमोल क्षणों में से एक है। मैं सभी देशवासियों की तरफ से, हमारे इन वीर जवानों के साथ-साथ, उन वीर माताओं को भी नमन करता हूं, जिन्होंने, मां-भारती के सच्चे सपूतों को जन्म दिया।

उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का जिक्र करते हुए कहा कि कारगिल युद्ध के समय अटल जी ने लालकिले से जो कहा था, वो, आज भी हम सभी के लिए बहुत प्रासंगिक है। अटल जी ने उस वक़्त गांधी जी का एक मंत्र लोगों को याद करने को कहा था कि अगर आप दुविधा में हो कि क्या करें, क्या ना करें तो देश के सबसे गरीब व्यकृ के बारे में सोचना चाहिए कि वो फैसला उसके हित में होगा या नहीं।

इसी तरह अटल जी ने कहा था कि, कारगिल युद्ध ने, हमें एक दूसरा मंत्र दिया है – ये मंत्र था, कि, कोई महत्वपूर्ण निर्णय लेने से पहले, हम ये सोचें, कि, क्या हमारा ये कदम, उस सैनिक के सम्मान के अनुरूप है जिसने उन दुर्गम पहाड़ियों में अपने प्राणों की आहुति दी थी।

बता दें कि अटल जी की राजनायिक समझ बुझ और भारत के सैनिकों की बहादुरी ने ना केवल कारगिल युद्ध जीता था बल्कि पाकिस्तान के साज़िश का पर्दाफाश भी किया था।

कोरोना वायरस महामारी को लेकर प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आज देश में रिकवरी रेट अन्य देशों के मुकाबले बेहतर है, साथ ही, हमारे देश में कोरोना से मृत्यु-दर भी दुनिया के ज्यादातर देशों से काफ़ी कम है. कोरोना का खतरा अभी टला नहीं है, हमें बहुत ही ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है।

उन्होंने कहा कि कोरोना काल में ग्रामीण क्षेत्रों ने पूरे देश को दिशा दिखाई है। गांवों से स्थानीय नागरिकों के, ग्राम पंचायतों के, अनेक अच्छे प्रयास लगातार सामने आ रहे हैं. बिहार में कई महिला सहायता समूहों ने मधुबनी पेंटिंग वाले मास्क बनाना शुरू किया है, और देखते-ही-देखते, ये खूब लोकप्रिय हो गये हैं। बांस से त्रिपुरा, मणिपुर, असम के कारीगरों ने उच्च गुणवत्ता की पानी की बोतल और टिफिन बॉक्स बनाना शुरू किया है।

प्रधानमंत्री ने कार्यक्रम में सूरीनाम के नये राष्ट्रपति चंद्रिका प्रसाद संतोखी के शपथ ग्रहण समारोह का जिक्र किया और उन्हें हार्दिक बधाई दी। उन्होंने कहा, “आज, सूरीनाम में एक चौथाई से अधिक लोग भारतीय मूल के हैं। क्या आप जानते हैं, वहां की आम भाषाओँ में से एक ‘सरनामी’ भी, ‘भोजपुरी’ की ही एक बोली है।”

प्रधानमंत्री मोदी ने बिहार और झारखंड के नौजवानों को लॉक डाउन के दौरान आत्म निर्भर बनने पर भी बधाई दी और कहा कि जब हम कुछ नया करने का सोचते हैं, ऐसे काम भी संभव हो जाते हैं, जिनकी आम-तौर पर, कोई कल्पना नहीं करता, जैसे कि, बिहार के कुछ युवाओं को ही लीजिए, पहले ये सामान्य नौकरी करते थे। एक दिन, उन्होंने, तय किया कि वो मोती यानी पर्ल्स की खेती करेंगे। उनके क्षेत्र में, लोगों को इस बारे में बहुत पता नहीं था, लेकिन, इन लोगों ने, पहले, सारी जानकारी जुटाई, जयपुर और भुवनेश्वर जाकर टैनिंग ली और अपने गाँव में ही मोती की खेती शुरू कर दी। आज,ये,स्वयं तो इससे काफ़ी कमाई कर रहे हैं, उन्होंने, मुजफ्फरपुर, बेगूसराय और पटना में अन्य राज्यों से लौटे प्रवासी मजदूरों को इसकी ट्रेनिंग देनी भी शुरू कर दी है | कितने ही लोगों के लिए, इससे, आत्मनिर्भरता के रास्ते खुल गए हैं I

गुलशन।

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