बिहार ने सरकारी ठेकों से चीनी कंपनियों को बाहर किया

गलवान घाटी में चीनी सेना से हिंसक झड़प के बाद पूरे देश मे चीनी उत्पादों और चीनी कंपनियों का बहिस्कार चरम पर हैं। इस झड़प में 16 बिहार रेजिमेंट के 20 जवान शहीद हो गए थे। चीन के खिलाफ बॉयकॉट मुहिम पर बिहार की नीतीश सरकार ने चीन को झटका देते हुए रविवार को पटना में गंगा नदी पर महात्मा गांधी सेतु के बगल में बनने जा रहे नए पुल का टेंडर रद कर दिया है।

सड़क निर्माण मंत्री नंद किशोर यादव ने कहा कि प्रॉजेक्ट के लिए चुने गए चार कॉन्ट्रैक्टर में से दो के पार्टनर चाइनीज थे। इस तरह से बिहार ने लद्दाख में 16 बिहार रेजिमेंट के सैनिकों पर धोखे से हमला करने वाले चीन को बड़ा झटका दिया है।

बिहार सरकार के शीर्ष आधिकारिक सूत्रों ने रविवार को कहा कि केंद्र ने निविदा रद्द कर दी क्योंकि परियोजना के लिए चुने गए चार में से दो ठेकेदार चीनी कंपनियां थीं। पूरी परियोजना पर 2,900 करोड़ रुपए का पूंजीगत खर्च आने का अनुमान है। इसमें 5.6 किलोमीटर लंबा मुख्य पुल, अन्य छोटे पुले, अंडरपास और रेल उपरगामी पुल शामिल हैं। उन्होंने बताया कि योजना के मुताबिक मुख्य सेतु के साथ चार अंडर पास, एक रेल उपरगामी पुल, 1.58 मार्ग सेतु, फ्लाइओवर, चार छोटे पुल, पांच बस पड़ाव और 13 रोड जंक्शन का निर्माण किया जाना है। परियोजना के लिए निर्माण की अवधि साढ़े तीन साल की थी और जनवरी 2023 तक पूरी होने वाली थी।

अब बिहार सरकार ने यह फैसला बॉयकॉट चाइना मुहिम की वजह से लिया है। पूर्वी लद्दाख में लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल पर मई से ही आक्रामकता दिखा रहे चीन ने 15 जून को भारतीय सैनिकों पर धोखे से हमला किया, जिसमें 20 भारतीय जवान शहीद हो गए थे।बता दें कि इस प्रोजेक्ट के लिए चाइना हार्बर इंजीनियरिंग कंपनी और शानशी रोड ब्रिज ग्रुप कंपनी (जॉइंट वेंचर) को चुना गया था। इस प्रोजेक्ट को पिछले साल दिसंबर में केंद्र सरकार के आर्थिक मामलों की कैबिनेट कमिटी ने मंजूरी दी थी, जिसकी अगुआई पीएम नरेंद्र मोदी ने की थी।

रितेश।

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