बिहार में गंडक नदी पर बना तटबंध टूटा, जिलाधिकारी करने लगे शहर बचाने की कयावद।

अब बस कहने की बात है कि भारत की आत्मा गांव में बसती है। जब कोई गांव डूबता है तो ना कोई सरकार उतनी गंभीर दिखाई देती है ना ही राष्ट्रीय मीडिया इस बात को कवर में कोई दिलचस्पी दिखाती है। वहाँ के लोगों की परेशानी, दिल्ली में चल रहे कोई राजनीतिक इवेंट या पाकिस्तान में किया गया कोई कमेंट से ज्यादा महत्वपूर्ण नहीं होता हैं।

दरअसल बात यह है कि गंडक नदी के पानी के बहाव को लेकर बिहार के जिला मुज़फ्फरपुर में गंडक नदी पर कई सारे नहर बनाए गए हैं। उसमें से एक नहर मुहम्मदपुर गांव से होकर निकलता है। बता दें कि उस नहर पर बना तटबंध 2 अगस्त को टूट गया।

आपको बता दें कि एक दिन पहले ही नहर पर बने बांध से पानी का रिसाव चालू हो गया था। मौके पर मौजूद गांव के मुखिया और स्थानीय लोगों ने उस रिसाव को रोकने का अथक प्रयास किया लेकिन पानी का बहाव तेज़ होने के वजह से रिसाव ना रुका।

इस घटना के बाद लोग भारी संख्या वहाँ एकत्रित होने लगे और उस बांध के पूरी तरह से टूट जाने पर कितनी क्षति पहुंचेगी या वहाँ के लोगों को जो तत्काल मदद मिले, इस कयावद में जुट गए।

वहीं मौके पर पहुंची प्रशासन की मंशा समझने में लोगों में थोड़ी देर हो गई। वहां पर पहुंची प्रशासन स्थिति का मुआयना करने नहीं गई थी, वो तो ये सुनिश्चित कर रही थी कि शहर बचा लिया जाए। नहर के बांध टूट जाने के बाद पानी शहर की ओर जा सकता था इसीलिए जिलाधिकारी ने उस पानी के रुख को फिर से दूसरे गांव की तरफ मोड़ दिया। इस कार्य को करने के लिए उन्होंने जेसीबी की भी मदद ली। इसके लिए उनको स्थानीय लोगों का गुस्सा भी झेलना पड़ा। वहीं कई राउंड पत्थरबाजी भी हुई।

बता दें कि बिहार के करीब 11 जिलों के लगभग 54 लाख लोग बाढ़ के चपेट में हैं। वहीं 16.89 लाख बाढ़ प्रभावित लोगों के साथ मुजफ्फरपुर सबसे ज्यादा प्रभावित जिला है, इसके बाद दरभंगा में 12.40 लाख और पूर्वी चंपारण में 8.09 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हैं।

गुलशन।

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