ब्लॉकबस्टर ‘शोले’ में सुरमा भोपाली की भूमिका निभाने वाले जगदीप नहीं रहे

हिंदी सिनेमा ने अपने एक और चहेते और शीर्ष हास्य कलाकारों में से एक जगदीप को अलविदा कह दिया। जगदीप 400 से अधिक फिल्मों का हिस्सा रहे थे। पर्दे पर हमेशा मुस्कुराता रहने वाला यह चेहरा हमेशा अपने प्रशंसकों के दिलों में जिंदा रहेगा। जगदीप का असली नाम सैयद इश्तियाक जाफरी था और उनके मंच का नाम जगदीप था, जिसकी वजह से उन्हें आज भी जाना जाता है। वह 81 वर्ष के थे।

1951 में आई बीआर चोपड़ा की अफसाना से जगदीप ने अपने कैरियर की शुरुआत की, फिर उन्होंने केए अब्बास की ‘मुन्ना’, गुरुदत्त की ‘आर पार’, बिमल रॉय की ‘दो बीघा जमीन’ में भी एक बाल कलाकार के रूप में अभिनय किया। उन्होंने रामसे बंधुओं की कई फिल्में जैसे ‘पुराना मंदिर’ में भी काम किया।

जगदीप के ख्याति की बात करें तो नेहरूजी भी उनके फैन थे। प्रधान मंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने उन्हें ‘हम पंछी इक दल के’ में अपने प्रदर्शन के लिए अपना बैटन उपहार में दिया था।

1975 के मल्टी-स्टारर ब्लॉकबस्टर शोले ने उन्हें किरदार सोरमा भोपाली के लिए एक घरेलू नाम बना दिया। इस किरदार से जगदीप अमर हो गए।

यह किरदार इतना प्रसिद्ध हुआ कि इसके चरित्र से प्रेरित होकर, उन्होंने एक फिल्म सूरमा भोपाली बनाई, लेकिन यह बॉक्स ऑफिस पर अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाई।

लगभग छह दशकों के अपने करियर में, उन्होंने शीर्ष अभिनेताओं, निर्देशकों और निर्माताओं के साथ काम किया। सत्तर और अस्सी के दशक में उनके कॉमेडी का तड़का हर तरफ देखा जा सकता था।

उनकी कुछ अन्य फिल्मों में ब्रह्मचारी और अंदाज़ अपना अपना भी शामिल हैं। आपको बता दें मशहूर कलाकार जावेद जाफरी और नावेद जाफरी है जगदीप के ही बेटे हैं।

जगदीप बचपन में काफी परेशानियों से गुजरे। छोटी उम्र में, उनके पिता की मृत्यु हो गई, फिर बाद में उन्होंने अपनी माँ की मदद करने के लिए अपनी पढ़ाई छोड़ दी। उन्होंने हिंदी सिनेमा में एक बाल कलाकार के रूप में काम करना शुरू किया, और जगदीप ने अपनी पहली फिल्म सिर्फ 3 रुपये में साइन की थी।

आज उनके शक्तिशाली प्रदर्शन के कारण हर कोई उन्हें याद कर रहा है। जगदीप ने इस दुनिया को छोड़ दिया है, अब यादें, फिल्में और उनसे जुड़ी कहानियां ही बची हैं।

गुलशन।

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