भारत के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी हुए 39 वर्ष के, जानते हैं उनकी उपलब्धियां।

भारत के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने मंगलवार को अपना 39 वां जन्मदिन मनाया। अपने धमाकेदार करियर में, एमएस धोनी ने क्रिकेट की दुनिया में एक ऐसी छाप छोड़ी है जो आने वाले सालों तक चमकेगी। धोनी ने 90 टेस्ट खेले हैं जिसमें उन्होंने 38.09 की औसत से 4,876 रन बनाए हैं। उन्होंने 350 वनडे भी खेले हैं जिसमें उन्होंने 50.57 की औसत से 10,773 रन बनाए हैं। धोनी, जिन्हें पहले कप्तानी के दिनों में ‘कैप्टन कूल’ के रूप में जाना जाता था, ने भारत के लिए 98 टी20 भी खेले हैं, जिसमें उन्होंने 37.60 की औसत से 1,617 रन बनाए हैं।

धोनी जब भारत के लिए चुने गए थे तो शुरुआत में कुछ अच्छा नहीं कर पाए लेकिन 2005 में वाइज़ाग में पाकिस्तान के खिलाफ उन्होंने 148 रन मारकर पूरी दुनिया को अपनी प्रतिभा दिखाई। जैसा कि लोग सुशांत सिंह राजोउत अभिनीत एम एस धोनी: द अनटोल्ड स्टोरी में देख चुके हैं।

विदित हो कि बड़े शॉट्स मारने की अपनी क्षमताओं के कारण, धोनी लक्ष्य का पीछा करने में सबसे प्रभावी खिलाड़ी में से एक साबित हुए, और धीरे-धीरे वे दुनिया के सर्वश्रेष्ठ रन-चेज़रों में से एक हो गए। 2005 की त्रिकोणीय श्रृंखला के मैच में जिम्बाब्वे के खिलाफ रन-चेज़ में उनका मैच जीतने वाला अर्धशतक उनकी सबसे यादगार पारियों में से एक है। एक महीने बाद श्रीलंका के खिलाफ रन-चेज़ में उनके तेजस्वी 183 ने धोनी को खेल के सबसे अच्छे फिनिशरों में अपना नाम इतिहास में लिख दिया।

अपने बढ़ते कद के साथ, धोनी को 2007 के टी20 विश्व कप के उद्घाटन वाले साल में भारत का नेतृत्व करने का मौका दिया गया, जहां उन्होंने सभी बाधाओं के खिलाफ ट्रॉफी के लिए युवाओं की टीम का नेतृत्व किया। वो मैच कहाँ हुने वाला है जब पाकिस्तान के खिलाफ फाइनल एक नेल-बाइटिंग थ्रिलर में बदल गया, और फिर भी, धोनी ने वर्षों से परिपक्वता दिखाई जब उन्होंने अंतिम ओवर में जोगिंदर शर्मा को गेंद दी, जिन्होंने मिस्बाह-उल-हक को आउट किया और भारत को मैच जिताया।

कुछ साल बाद, धोनी ने भारत को एकदिवसीय विश्व कप तक पहुंचाया, और भारत में होने वाले क्रिकेट के सबसे बड़े टूर्नामेंट के साथ, उम्मीदें अधिक थीं। हालांकि, एक बल्लेबाज के रूप में धोनी टूर्नामेंट के सर्वश्रेष्ठ नहीं थे, फिर भी उन्होंने खुद पर विश्वास किया और फाइनल में युवराज सिंह से पहले खुद बल्लेबाज़ी करने आ गए। यह निर्णय एक बार फिर सही साबित हुआ, क्योंकि फिनिशर धोनी ने नाबाद 91 रनों की पारी खेलकर भारत को एक और आईसीसी ट्रॉफी दिलाई।

2013 में, धोनी ने इंग्लैंड में आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी टूर्नामेंट में रोहित शर्मा और शिखर धवन को टीम के लिए सलामी बल्लेबाज के रूप में पदोन्नत किया। जहां रोहित सलामी बल्लेबाज के रूप में अनुभवहीन थे, धवन लगभग दो साल बाद टीम में वापसी कर रहे थे। एक बार फिर ‘कैप्टन कूल’ मास्टर का सिक्का सही बैठा क्योंकि भारत ने धोनी की कप्तानी में आईसीसी की एक और ट्रॉफी जीती। धोनी भारत के पहले कप्तान बने जिन्होंने तीनों आईसीसी ट्रॉफी जीती हो, इसमें कोई शक नहीं कि वह भारत के सबसे सफल कप्तानों में से एक हैं।

कप्तान के रूप में धोनी का रिकॉर्ड इंडियन प्रीमियर लीग में भी उल्लेखनीय रहा है, क्योंकि उन्होंने चेन्नई सुपर किंग्स को तीन बार खिताब दिलाया है।

धोनी ने अपनी बल्लेबाजी और कप्तानी के अलावा पिछले एक दशक में दुनिया के सर्वश्रेष्ठ विकेटकीपरों में से एक रहे हैं। उन्होंने अपने दिमाग को विकेट के पीछे इतना सटीक कर लिया था कि उन्होंने कई बार बिना देखे ही रन आउट किया है।

उन्होंने कई बार खिलाड़ियों को अपने तेज़ स्टंपिंग के जाल में फँसाया है। तो कई बार तो वो माइक में गेंदबाज को यह कहते नज़र आये हैं कि कौन सी बॉल डालनी चाहिए। और कई गेंदबाज़ अगले ही बॉल पर विकेट भी ले गए हैं। इन सब के प्रमाण यूट्यूब पर मौजूद हैं।

धोनी की समझ इस गेम के प्रति इतनी तगड़ी है वह स्टंप के पीछे से डीआरएस कॉल करने वाले सबसे सफल खिलाड़ियों में से एक रहे हैं। और यही कारण है कि सोशल मीडिया पर प्रशंसकों ने डीआरएस को ‘धोनी रिव्यू सिस्टम’ भी कहा। धोनी ऐसे खिलाड़ी हैं जिनके फैंस पूरे विश्व में हैं।

तालाबंदी होने से पहले धोनी भारतीय टीम का हिस्सा नहीं थे। पीछले साल विश्वकप के सेमीफाइनल में न्यूजीलैंड के खिलाफ मैच में हारने के बाद धोनी ने एक भी मैच नहीं खेला है। फैंस धोनी के भारतीय टीम में वापस आने की राह अभी भी देख रहे हैं।

गुलशन।

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