राजस्थान में राजनीतिक घमासान जारी, राज्यपाल कलराज मिश्र पर लग रहें कई इल्ज़ाम, पढ़े पूरी खबर

राजस्थान में राजनीतिक संकट खत्म होने का नाम नहीं ले रही है। सचिन पायलट का सीएम अशोक गहलोत और कांग्रेस नेतृत्व के खिलाफ खुला विद्रोह राजस्थान की राजनीति में हड़कंप पैदा कर दिया है। सोमवार को स्पीकर सीपी जोशी ने सुप्रीम कोर्ट में अपनी याचिका वापस ले ली, लेकिन जल्द ही वो एक और याचिका दायर करेंगे।

इस बीच, राजस्थान के राज्यपाल कलराज मिश्र ने अंतत: राज्य विधानसभा का सत्र बुलाने पर सहमति व्यक्त की, लेकिन गहलोत सरकार पर कई तरह के आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि सरकार को 21 दिन का नोटिस देने पर ही विधानसभा को बुलाया जा सकता है। अशोक गहलोत मंत्रिमंडल की सिफारिश वापस करते समय राज्यपाल ने तीन सुझाव दिए हैं।

मिश्रा ने यह भी लिखा कि राज्य सरकार को फ्लोर टेस्ट की कार्यवाही का सीधा प्रसारण करना चाहिए।

राजस्थान राजनीतिक संकट का शीर्ष घटनाक्रम:

राजस्थान के राज्यपाल कलराज मिश्र ने गहलोत सरकार के विधानसभा सत्र के लिए कैबिनेट नोट को दो बार लौटा दिया।

विधानसभा सत्र के रिक्वेस्ट को राज्यपाल द्वारा दो बार ठुकराने के बाद, निराश, सीएम अशोक गहलोत ने प्रधानमंत्री मोदी से राज्यपाल के व्यवहार के बारे में शिकायत की, गहलोत ने सोमवार को कहा, “मैंने कल प्रधानमंत्री से बात की और उन्हें राज्यपाल के व्यवहार के बारे में बताया। मैंने उनके साथ उस पत्र के संबंध में बात की जो मैंने उन्हें सात दिन पहले लिखा था।”

अब, राज्यपाल ने एक बयान जारी कर कहा है कि राजस्थान सरकार को विशेष विधानसभा सत्र के उद्देश्य स्पष्ट करना चाहिए। एक पत्र में, राजभवन ने कहा है कि गहलोत सरकार एक बार कहती है कि सत्र को एक विशेष कारण के लिए बुलाया जा रहा है और फिर मीडिया को बताया कि यह फ्लोर टेस्ट के लिए है। राज्यपाल ने गहलोत सरकार से विधानसभा सत्र के लिए अपने कारण बताने को कहा है।

इस बीच, राजस्थान विधानसभा के अध्यक्ष सीपी जोशी ने सुप्रीम कोर्ट से हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ अपनी याचिका वापस ले ली है और कहा है कि उच्च न्यायालय के नवीनतम आदेश पर जल्द ही एक और याचिका दायर की जाएगी।

राजस्थान हाई कोर्ट ने बसपा विधायकों के भाग्य पर स्पीकर सीपी जोशी के फैसले को जानने की मांग की और कहा कि उनके जवाब के बाद अदालत आगे बढ़ेगी। बता दें कि सपा ने पिछले साल कांग्रेस में विलय करने वाले अपने छह विधायकों पर उच्च न्यायालय का रुख किया था, जिससे राजस्थान में गहलोत सरकार की स्थिति मजबूत हुई थी।

आपको बता दें कि राजस्थान हाई कोर्ट ने भी कांग्रेस के साथ 6 बसपा विधायकों के विलय के खिलाफ भाजपा विधायकों की याचिका को खारिज कर दिया है। भाजपा ने हाल ही में विलय पर आपत्ति जताई थी।

उधर कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व विधानसभा के सत्र के लिए पुरजोर कोशिश कर रहा है। कांग्रेस के तीन वरिष्ठ नेताओं और पूर्व मंत्रियों, कपिल सिब्बल, सलमान खुर्शीद और अश्विनी कुमार ने विधानसभा सत्र आयोजित करने के प्रस्ताव को अस्वीकार करने के बाद राजस्थान के राज्यपाल कलराज मिश्र को पत्र लिखकर उन्हें राज्य में एक संवैधानिक संकट टालने के लिए कहा है।

संकट के बीच, अशोक गहलोत खेमे के कांग्रेस विधायकों ने जयपुर के होटल में “लोकतंत्र बचाओ, संविधान बचाओ” कार्यक्रम के तहत प्रार्थना सभा की। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, एआईसीसी महासचिव अविनाश पांडे और अन्य नेताओं ने बैठक में भाग लिया।

उधर कांग्रेस नेता पी चिदंबरम ने राजस्थान के राज्यपाल पर इल्ज़ाम लगाया की वो भारत के संविधान का उल्लंघन किया है। उन्होंने कहा, “2014 के बाद से भाजपा द्वारा नियुक्त राज्यपालों ने भारत के संविधान की पत्र और भावना का बार-बार उल्लंघन किया है। इस प्रक्रिया में, उन्होंने संसदीय लोकतंत्र, इसकी परंपराओं और परंपराओं को गंभीर रूप से बिगाड़ा है। मुझे याद आता है कि जब अरुणाचल प्रदेश (2016), उत्तराखंड (2016) और कर्नाटक (2019) में संविधान के घोर उल्लंघन में संबंधित राज्यपालों पर कार्रवाई हुई, तो तीन बार अदालतों ने इनके खिलाफ अहम फैसला सुनाया था।”

उधर हालिया अपडेट के अनुसार यह खबर आ रही है कि गहलोत खेमें के कम से कम 15 विधायक पायलट के संपर्क में हैं और जैसे ही गहलोत अपने विधायकों पर अपनी पकड़ ढीली करेंगे, वे सचिन पायलट खेमें में जा सकते हैं।

गुलशन।

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