हैवान पति को पत्नी ने दूसरी औरत के साथ रंगे हाथों पकड़ा ,दहेज के लिए करता था अपनी पत्नी को प्रताड़ित

जयशंकर प्रसाद ने लिखा है:-
नारी तुम केवल श्रद्धा हो,विश्वास रजत नग पगतल में
पीयूष स्रोत सी बहा करो ,जीवन के सुन्दर समतल में।


वैसे तो दुनिया चाँद और मंगल पर पहुंच चुकी है,लेकिन मानवता जंगल की तरफ जा रही है। विज्ञान जितनी तेजी से आगे बढ़ता जा रहा है, मानव चरित्र और नैतिक मूल्य उतने ही गिरते जा रहे हैं। हर दिन अखबारों में ज़रूर कुछ अमानवीय घटनाएँ आप पढ़ते होंगे। इनमें से स्त्रियों के प्रति अत्याचार बहुत ही आम घटना है। कभी छेड़छाड़,तो कभी बलात्कार,कभी भ्रूण हत्या,तो कभी दहेज उत्पीड़न। बिहार की शासन व्यवस्था लगातार ऐसी घटनाओं पर अंकुश लगाने में विफल रही है।
कुछ ऐसी ही घटना बिहार की राजधानी पटना से निकल कर आयी है। पटना सिटी के केशव राय गली,थाना-खाजेकलां की ‘नीलाक्षी कुमारी’ की शादी ग्राम-गरजौल पहाड़पुर,थाना-महुआ,जिला-वैशाली के ‘गोविन्द कुमार’ के साथ 19 मई 2013 को संपन्न हुई थी। नीलाक्षी के पिता ने अपनी हैसियत के अनुसार शादी के समय लड़के पक्ष को सवा लाख रुपये कैश, रंगीन टीवी,सोने-चांदी के गहने और बर्तन दिए थे। गोविन्द और नीलाक्षी के दांपत्य जीवन में एक पुत्र (अनमोल कुमार) और एक पुत्री(आम्रपाली) भी है। पीड़िता ‘नीलाक्षी’ का आरोप है की शादी के कुछ समय बाद से ही गोविन्द के परिजन उसे लगातार अपने पिता से एक लाख रूपये मांग कर लाने के लिए प्रताड़ित कर रहे हैं। नीलाक्षी के ससुराल के लोग बार-बार उसे जान मारने की धमकी देते है और कई दिनों तक खाना नहीं देते। हमेशा उसे कमरे में बंद रखते है और उनके बच्चो को भी काफी बेरहमी से मारते-पीटते रहते है. परिजनों में राजू महतो,डॉक्टर रमेश कुमार,वीरेंद्र महतो,सोनाली देवी,किरण देवी शामिल हैं। साल 2014 में एक बार उनके ससुराल वालों ने घर से निकाल दिया था ,तब पूरी रात वो घर से बाहर रहीं। जब यह सूचना नीलाक्षी के घर तक पहुंची तब उनके पापा,बहनोई और भाई उनके ससुराल पहुंचे। गोविन्द व उनके परिजनों ने उनके साथ भी बदसलूकी व गाली-गलौज़ की।
नीलाक्षी का कहना है की उनके पति गोविन्द का अपनी भाभी किरण देवी के साथ अवैध संबंध भी हैं.एक बार उन्होंने उन दोनों को आपत्तिजनक स्थिति में रंगे हाथ पकड़ा था,तब से उनपर अत्याचार और बढ़ गया है। इतना ही नहीं,एक बार जब नीलाक्षी जब कमरे में अकेली थी, तो उनके भैंसुर ‘राजू महतो’ ने उनकी इज़्ज़त लूटने की कोशिश की।ऐसी कई शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना नीलाक्षी के साथ होती रही है। उनके बच्चों की ज़िंदगी बिल्कुल अंधकारमय है। उन्हें हमेशा अपने और अपने बच्चों का डर रहता है। सारी परिस्थितियों को देखते हुए नीलाक्षी ने अपने पिता की सहमति से सुरक्षित रहने के लिए दिसंबर 2019 को अपने मायके पटना सिटी आ गई। उन्होंने अपनी शिकायत खाजेकलां थाने में भी दर्ज़ कराई ,लेकिन पुलिस ने कोई कारवाई नहीं की। नीलाक्षी ने कोर्ट का भी दरवाज़ा खटखटाया,लेकिन फैसला नहीं आया।प्रशासन और न्यायपालिका के दरवाजे पर घूमते हुए नीलाक्षी को कई साल हो गए ,लेकिन उनकी समस्या का समाधान नहीं हुआ। ज़रूरत है पुलिस को सख्त होने की और ऐसे गुनहगारों को सलाखों के पीछे भेजने की। तभी एक स्वच्छ समाज का निर्माण संभव है।

कुंदन सिंह

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